भगवान शिव को प्रसन्न करने की सर्वोत्तम विधि

"रुद्र" भगवान शिव का ही एक स्वरूप है, जो संहारक शक्ति एवं करुणा दोनों का प्रतीक माना जाता है। "अभिषेक" का अर्थ है — स्नान कराना अथवा जलादि द्रव्यों से सिंचन करना। इस प्रकार रुद्राभिषेक का शाब्दिक अर्थ है — भगवान शिव के रुद्र स्वरूप का विधिवत अभिषेक करना। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पर रुद्राभिषेक करवाना अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है क्योंकि यह स्थान स्वयं शिव का साक्षात निवास स्थल है।
रुद्राभिषेक पूजा में सर्वप्रथम गणपति पूजन किया जाता है, इसके पश्चात रुद्री पाठ (शिव के 11 अध्यायों वाला वैदिक स्तोत्र) का पाठ करते हुए शिवलिंग पर विभिन्न द्रव्यों से क्रमशः अभिषेक किया जाता है। इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" एवं महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक उच्चारण किया जाता है, जिससे वातावरण अत्यंत दिव्य एवं शक्तिशाली हो जाता है। अंत में शिवजी की आरती एवं भोग अर्पण के साथ पूजा का समापन होता है।
सोमवार, प्रदोष तिथि, महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास रुद्राभिषेक के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ अथवा किसी नए कार्य के आरंभ पर भी रुद्राभिषेक करवाना शुभ माना जाता है।