नारायण नागबलि त्र्यंबकेश्वर में संपन्न होने वाली सबसे विस्तृत, गंभीर और शक्तिशाली पूजाओं में से एक है। यह वास्तव में दो अलग-अलग अनुष्ठानों का संयुक्त रूप है — नारायण बलि, जो अकाल मृत्यु या असामान्य मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए की जाती है, और नागबलि, जो नाग हत्या दोष (चाहे जाने-अनजाने में हुई हो) के निवारण के लिए की जाती है। इन दोनों अनुष्ठानों को एक साथ इसलिए किया जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जब तक नागबलि द्वारा नाग दोष का निवारण नहीं होता, तब तक नारायण बलि से पितरों को पूर्ण मोक्ष प्राप्त नहीं हो पाता।
जिस परिवार में अकाल मृत्यु, वंश नाश, पीढ़ियों से अविवाहित रहने या संतान न होने की समस्या हो — उनके लिए नारायण नागबलि अत्यंत आवश्यक है।
नारायण नागबलि पूजा क्यों आवश्यक होती है?
जब परिवार में लगातार कई वर्षों से कोई शुभ कार्य सफल न हो पा रहा हो
जब संतान प्राप्ति में असाधारण रूप से देरी हो रही हो या बार-बार गर्भपात हो रहा हो
जब घर के किसी सदस्य की असमय अथवा दुर्घटनावश मृत्यु हुई हो
जब परिवार पर बार-बार आर्थिक संकट आता रहता हो
जब मानसिक अशांति, भय और नकारात्मक स्वप्न बार-बार आते हों
जब ज्योतिषीय विश्लेषण में सर्प दोष अथवा पितृ दोष की गंभीर पुष्टि हुई हो
तीन दिवसीय पूजा विधि का विस्तृत विवरण
प्रथम दिवस — प्रातःकाल गोदावरी स्नान के पश्चात संकल्प। गणपति पूजन, पुण्याहवाचन एवं मातृका पूजन। इस दिन नाग-नागिन की जोड़ी प्रतिमा आटे से बनाकर विधिवत पूजन तथा नाग दोष निवारण हेतु मंत्र जाप एवं हवन संपन्न होता है।
द्वितीय दिवस — नारायण बलि की मुख्य विधि प्रारंभ होती है। इसमें विष्णु स्वरूप नारायण की पूजा के साथ-साथ पितरों के निमित्त पिंडदान किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से "प्रेत शांति" कर्म भी सम्मिलित होता है।
तृतीय दिवस — तीसरे और अंतिम दिन ब्राह्मण भोज, कन्या भोज और दान-दक्षिणा के साथ पूजा का समापन होता है। गौ दान, अन्न दान एवं वस्त्र दान करना विशेष शुभ माना जाता है। अंत में सभी पूजन सामग्री एवं प्रतिमाओं का गोदावरी नदी में विसर्जन किया जाता है।
पूजा के दौरान आवश्यक सावधानियां
सात्विक एवं शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करना
ब्रह्मचर्य का पालन करना
मांस, मदिरा एवं तामसिक वस्तुओं से पूर्णतः दूर रहना
पूजा अवधि में नित्य गोदावरी स्नान करना
सफेद अथवा पीले वस्त्र धारण करना, काले वस्त्रों से परहेज करना
नारायण नागबलि किन्हें करवानी चाहिए?
यह विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए अनुशंसित है जिनकी कुंडली में एक साथ पितृ दोष एवं सर्प दोष दोनों की पुष्टि हुई हो, अथवा जिनके जीवन में उपरोक्त वर्णित समस्याएं अत्यंत गंभीर रूप में विद्यमान हों। इसे करवाने से पूर्व किसी विश्वसनीय ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण अवश्य करवा लेना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वास्तव में यह पूजा आवश्यक है या नहीं। पंडित संदीप देवांश त्रिपाठी जी निःशुल्क कुंडली परामर्श सेवा भी प्रदान करते हैं।