वैदिक ज्ञान — Vedic Knowledge
जानिए त्र्यंबकेश्वर पूजाओं का महत्व और विधि-विधान। सुझाव हेतु कॉल करें — +91 85752 20000

काल सर्प दोष 12 प्रकार के होते हैं — अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग। जानें आपको कौन सा दोष है और क्या है सटीक उपाय।

नारायण नागबलि पूजा किसे और क्यों करवानी चाहिए? तीन दिन की पूरी विधि विस्तार से जानें।

त्र्यंबकेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय है — इसका तीन मुख वाला शिवलिंग ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक है।

जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से होने वाला रुद्राभिषेक — जानें कौन सा अभिषेक किस समस्या के लिए सर्वोत्तम है और त्र्यंबकेश्वर में इसे करवाना क्यों विशेष माना जाता है।

"मृत्यु को जीतने वाला मंत्र" कहे जाने वाले महामृत्युंजय मंत्र का महत्व, इसे करवाने का सही समय और जाप की संख्या के बारे में जानें।

जिन पितरों का श्राद्ध तीन वर्ष या उससे अधिक समय से नहीं हुआ, उनके लिए त्रिपिंडी श्राद्ध क्यों आवश्यक है — गोदावरी तट पर होने वाली इस पूजा की पूरी विधि जानें।

नासिक से त्र्यंबकेश्वर की दूरी, ट्रेन-बस-हवाई मार्ग, ठहरने की जगह और दर्शन का सही समय — पहली बार जाने वाले भक्तों के लिए पूरी गाइड।