मृत्यु पर विजय पाने का दिव्य मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद में वर्णित एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है, जिसे "मृत्यु को जीतने वाला मंत्र" कहा जाता है। इस मंत्र में भगवान त्र्यंबक (त्रिनेत्रधारी शिव) की स्तुति की गई है, और यह प्रार्थना की गई है कि जिस प्रकार पका हुआ फल अपने आप बेल से अलग हो जाता है, उसी प्रकार हमें अकाल मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिले और हम अमरता की ओर अग्रसर हों। त्र्यंबकेश्वर में इस मंत्र का जाप करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है क्योंकि यह मंत्र स्वयं भगवान "त्र्यंबक" को संबोधित है, और यही उनका मूल निवास स्थान है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
महामृत्युंजय जाप सामान्यतः 11,000, 1,25,000 अथवा 11,00,000 की संख्या में संकल्प के अनुसार करवाया जाता है। बड़ी संख्या के जाप में कई पुरोहित मिलकर सामूहिक रूप से मंत्रोच्चारण करते हैं, जिसे "महामृत्युंजय महायज्ञ" भी कहा जाता है। जाप के पश्चात हवन एवं पूर्णाहुति के साथ अनुष्ठान का समापन होता है।