वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह (shadow planets) माना जाता है। जन्म कुंडली में राहु या केतु किसी अशुभ भाव में स्थित हों, किसी ग्रह के साथ युति में हों, अथवा दृष्टि दोष उत्पन्न कर रहे हों, तो जातक को करियर, विवाह, स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में राहु केतु जप — यानी राहु और केतु के बीज मंत्रों का विधिवत जाप — इन दोनों ग्रहों को शांत करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव स्वयं राहु-केतु सहित समस्त नवग्रहों के अधिष्ठाता माने जाते हैं, इसलिए यहां करवाया गया राहु केतु जप विशेष फलदायी होता है। अधिक जानकारी के लिए +91 85752 20000 पर कॉल करें।
राहु केतु जप की संपूर्ण विधि
संकल्प — यजमान अपने गोत्र, नाम और उद्देश्य के साथ संकल्प लेता है।
गणपति पूजन — विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन ताकि अनुष्ठान निर्विघ्न सम्पन्न हो।
नवग्रह पूजन — राहु-केतु सहित समस्त नवग्रहों का संक्षिप्त पूजन।
राहु बीज मंत्र जाप — "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का विधिवत जाप (संकल्प अनुसार 11,000 अथवा उससे अधिक)।
केतु बीज मंत्र जाप — "ॐ कें केतवे नमः" मंत्र का विधिवत जाप (संकल्प अनुसार 11,000 अथवा उससे अधिक)।
हवन — समिधा, घी, तिल एवं राहु-केतु से संबंधित हवन सामग्री से आहुतियां।
दान-दक्षिणा — शास्त्रोक्त विधि अनुसार राहु के लिए काले तिल-कंबल तथा केतु के लिए बहुरंगी वस्त्र का दान।
राहु केतु जप के लाभ
करियर एवं व्यवसाय में आ रही अनावश्यक बाधाओं का निवारण
मानसिक भ्रम, अकारण भय एवं चिंता में कमी
विवाह एवं संतान संबंधी विलंब में सहायक
अचानक हानि, दुर्घटना अथवा गुप्त शत्रु बाधा से सुरक्षा
काल सर्प दोष जैसी अन्य राहु-केतु जनित समस्याओं में सहायक पूरक अनुष्ठान
राहु केतु जप किन्हें करवाना चाहिए?
जिनकी कुंडली में राहु/केतु महादशा अथवा अंतर्दशा चल रही हो
जिन्हें ज्योतिषी ने राहु-केतु के अशुभ प्रभाव की पुष्टि की हो
जो करियर, व्यापार अथवा विदेश यात्रा में बार-बार अड़चन झेल रहे हों
जो काल सर्प दोष पूजा के साथ पूरक उपाय के रूप में जप करवाना चाहते हों
यह अनुष्ठान पूर्णतः श्रद्धा और आस्था पर आधारित है और किसी चिकित्सा उपचार, कानूनी सलाह अथवा वित्तीय निर्णय का विकल्प नहीं है। मुहूर्त एवं बुकिंग हेतु पंडित जी को +91 85752 20000 पर कॉल करें।